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Query: Is there any welfare association for obc in mp
As I know, in Union Bank of India, now OBC Employees Welfare Association is not functional in Madhya Pradesh. People of Union Bank have formed a whatsapp Group where they are interacting among themselves. They are trying to establish an association.
Query: Myself Bank clerk, annual salary 15 lac, can my children have non creamy layer OBC Certificate. Please elaborate and guide.
Dear Balaram Ji,
I am replying your answer. Please go through it. There may be some hurdle to get the OBC certificate but you should apply for it and try to get, even after some hardship. Because as I feel, Govt. authorities will sometime, somewhere not willing to go with the details, they simply focus on Rs. 8.00 lacs ceiling for creamy layer.
What is Non-Creamy Layer OBC Certificate and Eligibility
In India, the Other Backward Classes (OBC) reservation system provides quotas in education, government jobs, and certain other opportunities to promote social equity. However, to ensure benefits reach the truly disadvantaged sections,
OBCs are divided into two categories:
• Creamy Layer: Economically and socially advanced OBC individuals/families who are not eligible for reservations.
• Non-Creamy Layer (NCL): Less advantaged OBC families who are eligible for reservations (e.g., 27% in central government jobs and educational institutions).
The Non-Creamy Layer OBC (NCL-OBC) certificate is a key document that certifies your family’s eligibility for these benefits. It’s valid for one year from the date of issue and must be obtained afresh for each application (e.g., for exams like UPSC, NEET, or job recruitments).
Key Eligibility Criteria for Non-Creamy Layer
The criteria are governed by the Department of Personnel and Training (DoPT) guidelines under the Government of India.
As of October 2025, there has been no revision to the income ceiling despite ongoing discussions in Parliament. Here’s a breakdown relevant to your situation:
1. Income Criterion:
• The gross annual family income (of both parents combined) must be below ₹8 lakhs to qualify as Non-Creamy Layer.
• Important Exclusion: Income from salaries (your bank clerk salary) and agricultural land is not counted towards this limit. Only income from other sources—such as business, profession, rent, interest/dividends, or freelance work—is considered.
• In your case: Your annual salary is ₹15 lakhs, but since this is salary income, it is excluded. If your family has no other income sources exceeding ₹8 lakhs (e.g., no business profits, rental income, etc.), your children qualify as Non-Creamy Layer.
• Note: The income is calculated for the previous financial year (e.g., FY 2024-25 for a 2025 certificate). You’ll need to submit income proofs like ITRs (Income Tax Returns) for both parents, Form 16 (for salary), and any other relevant documents to verify this.
2. Post/Occupation Criterion:
• Creamy Layer status can also be triggered by the rank/post of parents, regardless of income.
• Government employees (or those in Public Sector Undertakings like banks) are classified into groups:
• Group A/Class 1 (e.g., senior officers): Children are automatically Creamy Layer.
• Group B/Class II (e.g., junior officers): Automatically Creamy Layer.
• Group C/Class III (e.g., clerks, assistants)*: Not automatically Creamy Layer; eligibility depends on income (as above).
• As a bank clerk, you fall under Group C in public sector banks (e.g., SBI, PNB). This does not make your family Creamy Layer on its own. Combined with the income exclusion for salary, your children remain eligible.
Please go through these guidelines.
Query: ओबीसी क्रीमी लेयर प्रमाणपत्र प्राप्त करने की प्रक्रिया क्या है, और इसके लिए कौन से दस्तावेज़ आवश्यक हैं?
क्रीमी लेयर प्रमाणपत्र की आवश्यकता नहीं होती; बल्कि नॉन-क्रीमी लेयर (NCL) प्रमाणपत्र जारी किया जाता है, जो यह साबित करता है कि व्यक्ति क्रीमी लेयर में नहीं है। प्रक्रिया:
आवेदन: तहसीलदार/जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय में आवेदन करें।
दस्तावेज़:
ओबीसी जाति प्रमाणपत्र।
आय प्रमाणपत्र (आयकर रिटर्न, वेतन पर्ची आदि)।
माता-पिता की नौकरी का विवरण (यदि सरकारी)।
आधार कार्ड, निवास प्रमाणपत्र।
जाँच: स्थानीय राजस्व अधिकारी आय और सामाजिक स्थिति की जाँच करते हैं।
प्रमाणपत्र: NCL प्रमाणपत्र 1 वर्ष के लिए वैध होता है।
प्रक्रिया राज्य-विशिष्ट हो सकती है, जैसे बिहार में ऑनलाइन RTPS पोर्टल के माध्यम से।
Query: क्या क्रीमी लेयर की स्थिति केवल आय पर आधारित है, या इसमें अन्य सामाजिक-आर्थिक कारक भी शामिल हैं?
क्रीमी लेयर की स्थिति केवल आय पर आधारित नहीं है। सामाजिक-आर्थिक कारक भी शामिल हैं, जैसे:
माता-पिता का पेशा: यदि माता-पिता उच्च सरकारी/निजी पदों (ग्रुप A/B) पर हैं।
शिक्षा और सामाजिक स्थिति: परिवार की शैक्षणिक उपलब्धियाँ और सामाजिक प्रभाव।
संपत्ति और आय के स्रोत: अचल संपत्ति, व्यवसाय, या अन्य निवेश।
उदाहरण: यदि माता-पिता कक्षा 1 अधिकारी हैं, तो बच्चे क्रीमी लेयर में माने जाते हैं, भले ही आय 8 लाख से कम हो। यह नीति सामाजिक-आर्थिक समग्रता को ध्यान में रखती है।
https://aiobc.org/wp-content/uploads/2022/05/DoPT-6-10-2017-for-PSU1-1.pdf
Query: क्रीमी लेयर निर्धारित करने के लिए सरकार द्वारा कौन से मानदंड (आय के अलावा) उपयोग किए जाते हैं?
क्रीमी लेयर का निर्धारण केवल आय पर नहीं, बल्कि सामाजिक-आर्थिक स्थिति पर आधारित है। केंद्र सरकार के दिशानिर्देशों (DoPT, 1993, संशोधित 2017) के अनुसार मानदंड:
- माता-पिता की सरकारी नौकरी: यदि माता-पिता कक्षा 1 या समकक्ष (ग्रुप A/B) सरकारी पदों पर हैं।
2. संपत्ति: कृषि भूमि या अचल संपत्ति से आय (8 लाख से अधिक)।
3. पेशा: पेशेवर व्यवसाय (डॉक्टर, वकील आदि) से उच्च आय।
4. सामाजिक स्थिति: यदि व्यक्ति/परिवार सामाजिक रूप से उन्नत माना जाता है।
5. आय के अलावा, यदि माता-पिता उच्च पदों पर हैं (जैसे IAS, IPS), तो बच्चे क्रीमी लेयर में आते हैं, भले ही आय सीमा से कम हो।
https://aiobc.org/wp-content/uploads/2022/05/DoPT-6-10-2017-for-PSU1-1.pdf
Query: क्रीमी लेयर के अंतर्गत आने वाले व्यक्तियों को ओबीसी आरक्षण से क्यों बाहर रखा जाता है?
क्रीमी लेयर के व्यक्तियों को आरक्षण से बाहर रखने का उद्देश्य सामाजिक-शैक्षणिक रूप से पिछड़े लोगों को प्राथमिकता देना है। सुप्रीम कोर्ट (इंद्रा साहनी, 1992) ने कहा कि ओबीसी का उन्नत वर्ग (जो आर्थिक/सामाजिक रूप से सक्षम है) समाज में पहले से ही स्थापित है, इसलिए उन्हें आरक्षण की आवश्यकता नहीं। यह नीति सुनिश्चित करती है कि संसाधन वास्तविक रूप से वंचित लोगों तक पहुँचें, न कि उन तक जो पहले ही सामाजिक-आर्थिक लाभ प्राप्त कर चुके हैं। हालाँकि ओबीसी के कई संगठन विशेषकर AIOBC कार्मिक महासंघ क्रीमी लेयर की अवधारना से सहमत नहीं है और सरकार से इसे ख़त्म करने का आग्रह वर्षों से करता आ रहा है.
Query: ओबीसी क्रीमी लेयर की आय सीमा क्या है, और इसे समय-समय पर कैसे संशोधित किया जाता है?
वर्तमान में (2025 तक), क्रीमी लेयर की आय सीमा 8 लाख रुपये प्रति वर्ष है (सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, 2017 में संशोधित)। यह सीमा माता-पिता या परिवार की सकल वार्षिक आय (वेतन, व्यवसाय, संपत्ति आदि से) पर आधारित है। संशोधन समय-समय पर राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC) और सामाजिक न्याय मंत्रालय की सिफारिशों पर होता है, जिसमें मुद्रास्फीति और आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखा जाता है।
उदाहरण: 1993 में 1 लाख, 2004 में 2.5 लाख, 2008 में 4.5 लाख, 2013 में 6 लाख, और 2017 में 8 लाख रुपये।
Query: ओबीसी में क्रीमी लेयर की अवधारणा क्या है और इसे पहली बार कब लागू किया गया?
क्रीमी लेयर ओबीसी के उन व्यक्तियों/परिवारों को संदर्भित करता है जो सामाजिक-आर्थिक रूप से उन्नत हैं और इसलिए आरक्षण के लाभ से बाहर रखे जाते हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आरक्षण का लाभ केवल सामाजिक-शैक्षणिक रूप से पिछड़े लोगों को मिले। यह अवधारणा सुप्रीम कोर्ट के इंद्रा साहनी बनाम भारत सरकार (1992) मामले में सामने आई, जब मंडल आयोग की सिफारिशों (27% आरक्षण) को लागू किया गया। क्रीमी लेयर को पहली बार 1993 में केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित किया गया, जिसमें आय सीमा 1 लाख रुपये प्रति वर्ष तय की गई थी। वर्तमान में यह सीमा 8 लाख रूपये प्रतिवर्ष है.
Query: ओबीसी समुदाय के सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए सरकार ने कौन से विशेष कार्यक्रम शुरू किए हैं?
सरकार ने ओबीसी के उत्थान के लिए कई कार्यक्रम शुरू किए:
शिक्षा: ओबीसी छात्रवृत्ति योजना, प्री/पोस्ट-मैट्रिक सहायता।
रोजगार: 27% आरक्षण, कौशल विकास (PMKVY के तहत OBC फोकस)।
वित्तीय: NBCFDC ऋण (व्यवसाय के लिए सब्सिडी)।
विशेष: रोहिणी आयोग (उप-वर्गीकरण, 2017), ओबीसी विकास कार्यक्रम (शिक्षा/स्वास्थ्य केंद्र)।
राज्य स्तर पर: बिहार जाति सर्वेक्षण आधारित योजनाएँ, राजस्थान OBC वेलफेयर बोर्ड। ये कार्यक्रम सामाजिक समानता और आर्थिक सशक्तिकरण पर केंद्रित हैं।
Query: राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC) की भूमिका और शक्तियाँ क्या हैं?
राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC) 1993 अधिनियम, 2018 में संवैधानिक दर्जा प्रदान किया गया. यह आयोग एक शक्तिशाली आयोग है और ओबीसी व्यक्तियों के हितों की रक्षा करता है।
भूमिका:
ओबीसी सूची में जातियों का समावेश/बहिष्कार की सिफारिश।
शिकायतों की जाँच (आरक्षण उल्लंघन आदि)।
विकास योजनाओं की निगरानी।
शक्तियाँ:
दीवानी न्यायालय जैसी (दस्तावेज माँगना, गवाह बुलाना)।
रिपोर्ट सरकार को सौंपना, जो संसद में प्रस्तुत होती है।
यह ओबीसी के सामाजिक-आर्थिक उत्थान में सलाहकार भूमिका निभाता है।
Query: ओबीसी के लिए नौकरियों में आरक्षण का प्रतिशत कितना है और इसे लागू करने वाला कानून कौन सा है?
केंद्र सरकार की नौकरियों में ओबीसी को 27% आरक्षण है (कुल 49.5% आरक्षण में, जिसमें SC 15%, ST 7.5%)।
लागू करने वाला कानून: अनुच्छेद 16(4) के तहत, केंद्रीय सेवाएँ (आरक्षण के लिए) नियम, 1997। इंद्रा साहनी केस (1992) ने 27% को मंजूरी दी।
यह राज्य स्तर पर भिन्न भिन्न हैं (जैसे बिहार में 43%)। क्रीमी लेयर को आरक्षण से बहार रखा गया है । सुप्रीम कोर्ट ने कुल आरक्षण की सीमा 50% सीमा तय की है, लेकिन EWS के मामले में आर्थिक आधार पर 10 प्रतिशत आरक्षण देने से यह सीमा ख़त्म हो गई है.
Query: संविधान की धारा 340 का ओबीसी के संदर्भ में क्या महत्व है?
अनुच्छेद 340 पिछड़े वर्गों (ओबीसी सहित) की स्थिति की जाँच के लिए राष्ट्रपति को आयोग गठित करने की शक्ति देता है।
इसका महत्व:
ओबीसी के सामाजिक-शैक्षणिक पिछड़ेपन का आकलन और उत्थान उपाय सुझाना। मंडल आयोग (1979) और कालेलकर आयोग (1953) इसी के तहत बने।
2017 में रोहिणी आयोग (ओबीसी उप-वर्गीकरण) भी इसी आधार पर बनाया गया ।
इसकी रिपोर्ट संसद में प्रस्तुत होती है, जो आरक्षण नीतियों का आधार बनती है। यह ओबीसी के समावेशी विकास का मूल प्रावधान है।
Query: ओबीसी की सूची में शामिल होने के लिए सरकार द्वारा निर्धारित मानदंड क्या हैं?
ओबीसी सूची में शामिल होने के लिए राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC) 11 सामाजिक-शैक्षणिक-आर्थिक मानदंडों का उपयोग करता है (मंडल आयोग आधारित):
सामाजिक: जाति व्यवस्था में निचला स्थान, छुआछूत का शिकार, पारंपरिक शिल्पों पर निर्भरता।
शैक्षणिक: कम साक्षरता दर (राष्ट्रीय औसत से 25% कम), ड्रॉपआउट दर अधिक।
आर्थिक: सरकारी नौकरियों में कम प्रतिनिधित्व (राष्ट्रीय औसत से 7.5% कम), कृषि/श्रम पर निर्भरता।
राज्य सरकारें अपनी सूची बनाती हैं, लेकिन केंद्र सूची के लिए NCBC सिफारिश करता है। क्रीमी लेयर (आय >8 लाख) बाहर। आवेदन राज्यवार जांच के बाद होता है।
Query: केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा ओबीसी के लिए चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं के नाम बताएँ।
केंद्र सरकार की योजनाएँ:
पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना (OBC)।
प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति।
NBCFDC ऋण योजना (व्यवसाय/शिक्षा के लिए सब्सिडी)।
ओबीसी विकास कार्यक्रम (शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण)।
राज्य सरकारों की प्रमुख योजनाएँ:
बिहार: ओबीसी कल्याण योजना (आरक्षण व वित्तीय सहायता)।
राजस्थान: ओबीसी छात्रवृत्ति और आवास योजना।
उत्तर प्रदेश: ओबीसी विकास निगम (ऋण व प्रशिक्षण)।
महाराष्ट्र: महाराष्ट्र राज्य पिछड़ा वर्ग विकास महामंडल।
ये योजनाएँ शिक्षा, रोजगार और आर्थिक उत्थान पर फोकस करती हैं।
Query: ओबीसी को शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण का लाभ किन प्रावधानों के तहत मिलता है?
ओबीसी को उच्च शैक्षणिक संस्थानों में 27% आरक्षण अनुच्छेद 15(4) के तहत मिलता है, जो राज्य को पिछड़े वर्गों के लिए विशेष प्रावधान की अनुमति देता है।
प्रमुख प्रावधान:
केंद्रीय संस्थान: IIT, IIM, AIIMS आदि में 27% सीटें आरक्षित (2006 से लागू, सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी 2008 में)।
क्रीमी लेयर बाहर: वार्षिक आय 8 लाख से अधिक वाले परिवारों को लाभ नहीं।
कानूनी आधार: केंद्रीय शैक्षणिक संस्थान (आरक्षण) अधिनियम, 2006।
राज्य स्तर पर भी समान प्रावधान, जैसे मध्य प्रदेश में 27% आरक्षण (2025 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा पुष्टि)। यह सामाजिक-शैक्षणिक पिछड़ेपन को दूर करने के लिए है।

